वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद

CSIR

प्रौद्योगिकी सीएसआईआर - 800



सोलार साल्ट पेन में उच्च गुणवत्तावाले नमक बनाने की बेहतर प्रक्रिया।



उपयोग :

साधारण नमक अथवा सोडियम क्लोराइड खाने के अतिरिक्त विभिन्न रसायन जैसे कि सोडियम कार्बोनेट (सोडा एश), सोडियम हाइड्रोक्साइड (कास्टिक सोडा) एवं क्लोरीन बनाने में प्रयोग होता है। इसके अतिरिक्त नमक बहुत से उद्योगों जैसे टेक्सटाईल, डेरी, खाद्य, खाद, चमड़ा, कागज एवं चिकित्सा आदि में प्रयोग होता है।


प्रौद्योगिकी/उत्पाद का संक्षिप्त एवं विशेष विवरण :


सौर नमक समुद्री, भूमिगत एवं जील के ब्राइन से प्राप्त होता है। इस ब्राइन से प्राप्त नमक में Ca, Mg, SO4 और भारी धातुओं की अशुघ्धियां होती हैं। इसके अलावा यह नमक कम सफेद होता है। इसलिए अतिशुघ्ध नमक बनाने की प्रक्रिया किफायती भी हो वह बहुत जरूरी है। प्रस्तुत तकनीक एक किफायती प्रक्रिया के द्बारा अतिशुद्ध नमक जिसमें औद्योगिक मांग के अनुसार Ca/Mg का अनुपात संबंधी वर्णन प्रस्तुत किया गया है।
इस प्रक्रिया के अनुसार ब्राइन को 24 0Be’ तक विशेष प्रकार से निर्मित सोलर पेन में सांद्रित किया जाता है। सांद्रित ब्राइन में कम मात्रा में एक सामान्य रसायन का प्रयोग करके जिप्सम एवं अघुलनशील पदार्थों को सोल्ट क्रिस्टेलाइजर्स में जाने से रोका जाता है। और साफ ब्राइन का pH एक निश्चित मात्रा तक कम किया जाता है। तत्‌पश्चात 25 0Be’ और 28.5 0Be’ के बीच में नमक प्राप्त किया जाता है जिसको ढेर के रूप में इकट्ठा किया जाता है। नमक के ढेर का अनुपात पानी या डायल्यूट ब्राइन से घुलाई होती है। इस प्रकार ढेर के घुले हुए नमक की गुणवत्ता एवं Ca से Mg का अनुपात औद्योगिक अनुरूपता के अनुसार होता है। यह प्रक्रिया जिप्सम एवं अघुलनशील पदार्थों को हटाकर क्रिस्टल के आकार तथा माप को नियंत्रित करने पर आधारित है। साल्ट स्फटिक को संपूर्ण बनाकर अशुद्धियों को इसके अंदर जाने से रोका जाता है। अतिशुघ्द्घ नमक बनाने की यह प्रक्रिया अति सरल है तथा किसी भी नमक के कारखाने में आसानी से प्रयुक्त की जा सकती है।


नवीनतम अन्वेषण जो अन्य से विशिष्ट है ।
परंपरागत प्रक्रिया द्बारा बनाए गए नमक में Ca, Mg, SO4 एवं भारी धातुओं की मात्रा अधिक होती है तथा इसे उद्योगों के लिए प्रयोग करना उचित नहीं होता है। अशुद्धियों की मात्रा अधिक होने के कारण उद्योगों को इसे साफ करने में अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। इसके अलावा इसे साफ करने के दौरान जो फ्लक्स  (सिनग) निकलता है उससे वातावरण प्रदूषित होता है। कुछ विशेष रसायन बनाने में अशुद्धि की कम मात्रा का अतिरिक्त महत्व होता है।

इस प्रक्रिया के द्बारा बहुत कम अतिरिक्त खर्च में अतिशुद्धतावाला नमक जिसमें Ca से Mg का अनुपात 2 – 3:1 जो औद्योगिकी के लिए अनिवार्य है उसे प्राप्त किया जा सकता है।

उपयोग में आनेवाले मुख्य कच्चे पदार्थ एवं स्रोत :


इस प्रक्रिया में साधारण तथा नमक उत्पादकों के द्बारा प्रयोग किया जानेवाला समुद्री, भूमिगत एवं जील का ब्राइन इस्तेमाल किया जाता है। इसके अतिरिक्त ppm मात्रा में आसानी से उपलब्ध एवं सस्ते रसायन का प्रयोग किया जाता है।

बुनियादी ढांचे एवम्‌ कार्मिकों की आवश्यकता :


इस प्रक्रिया में अतिरिक्त श्रमशक्ति एवं किसी अन्य बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता नहीं है।

प्रौद्योगिकी की वर्तमान स्थिति :


तकनीक >10,000 टन नमक उत्पादन के पैमाने पर एक व्यावसायिक साल्ट वर्कस में सफलता के साथ प्रदर्शित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त यह तकनीक गुजरात में एलआरके (Little Rann of Kutch) में 110 तथा मालिया के 170 छोटे नमक उत्पादन केन्द्रों में तथा राजस्थान एवं उड़ीसा मे कार्यान्वित की जा चुकी है।

न्यूनतम किफायती यूनिट का आकार, माप एवं कीमत:


यह तकनीक, रेखांकित मॉडल में बनाये हुए किसी भी प्रकार के प्लान्ट में आसानी से क्रियान्वित की जा सकती है। गुजरात और उड़ीसा में 1 टन नमक उत्पादन में 15 रूपये से कम तथा राजस्थान में 50 रूपये से कम सामान्य प्रक्रिया से अतिरिक्त व्यय होता है।

प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रक्रिया :


 CSIR/CSMCRI के नियमानुसार

उत्पाद की स्वीकार्यता :


भारत के जानेमाने क्लोर आल्कली एवं सोडा एश कम्पनियों द्बारा नमक का विश्लेषण हो चुका है और नमक की शुद्धता क्लोर आल्कली एवं सोडा एश कम्पनियों के लिए अनुयोज्य प्रामाणित किया गया है।

विक्रेयता :

60% से अधिक नमक उत्पाद क्लोर आल्कली एवं सोडा एश कम्पनीयों में प्रयुक्त होता है। शुद्ध नमक की मांग न केवल स्वदेश मे है बल्कि विदेशों में भी इसकी मांग है। इस प्रकार उच्च शुद्धतावाले नमक को बेचने के लिए व्यापक और आसान बाजार उपलब्ध  है।
क्या इस प्रौद्योगिकी के लिये विशेष स्थल की आवश्यकता है ? यदि हाँ तो विवरण दीजिए।
यदि पूर्व निर्धारित परिस्थितियां उपलब्ध हैं तो तकनीक को किसी भी साल्ट वर्क्स में क्रियान्वित किया जा सकता है।

लाभार्थी :

सोलर नमक उत्पादक एवं सोडा एश तथा क्लोर आल्कली कम्पनी।

अन्य जानकारी :


तकनीक किफायती एवं वातावरण के अनुकूल है।

संपर्क :

  1. डॉ. वी. पी. मोहनदास,

वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष,
नमक व समुद्री रसायन विभाग,
ई-मेल: mohandas@csmcri.org, फोन 0278 – 2567039

  1. डॉ. ए. एम. भट्ट,

वैज्ञानिक,
भावनगर 364 021, गुजरात
ई-मेल: ambhatt@csmcri.org, फोन 0278 – 2567760 (विस्तरण : 745)

  1. डॉ. अरविंद कुमार,

वैज्ञानिक,
ई-मेल: arvind@csmcri.org, फोन 0278 – 2567760 (विस्तरण : 746)

  1. डॉ. आई. मुखोपाघ्याय,

वैज्ञानिक,
ई-मेल: indrajit@csmcri.org, फोन 0278 – 2567760 (विस्तरण : 746)


केन्द्रीय नमक व समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान,
भावनगर  364 021, गुजरात