वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद

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हमारे अनुसंधान एवं विकास के मुख्य क्षेत्र



हाल में, संस्थान की अनुसंधान एवं विकास गतिविधियां मुख्यतः निम्नलिखित क्षेत्रों में हो रही हैं।

नमक एवं समुद्री रसायण विभाग

यह विभाग इस संस्थान का उद्‌गम विभाग है। इस विभाग की संशोधन गतिविधियाँ, समुद्र, भूमिगत और सरोवर के ब्राइन में से उत्पादित नमक की उपज़ तथा गुणवत्ता में सुधार एवं बिटर्न के तलछटीय प्रवाह द्बारा पोटाश, मेग्नेशिया जैसे मूल्यवान समुद्री रसायनों की प्राप्ति हेतु प्रक्रियाओं का विकास करने पर केन्द्रीत हैं।

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अकार्बनिक पदार्थ तथा उत्प्रेरक विभाग

1982 में इस विभाग की शुरुआत हुइ, और O2, N2 तथा CO जैसे गैसीय अणुओं का उपयोग करके, पर्यावरणीय तथा औद्योगिकीय रुप से महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाओं के लिये सहसंयोजक (कोर्डीनेशन) धातु संयोजको को समांग उत्प्रेरक के रुप में उपयोग करने की संभावनाओं का प्रयास किया गया। 1982 से 1991 के दौरान, आण्विक स्तर पर ओक्सीडेशन, इपोक्सीडेशन तथा जल अपघटन (हाइड्रोफोरमीलेशन) जैसी प्रतिक्रियाओं के लिये धातु संयोजकों के संश्लेषण में इस विभाग का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इन सब संशोधन कार्यो पर केटालिसिस तथा इनओरगेनीक मेटल कोम्पलेक्सीस के जरनलो में सैंकडो लेख तथा कुछ पेटन्ट प्रकाशित हुए हैं जिसने अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर विभाग की अलग पहचान कराई है।...

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वैद्युत झिल्ली प्रक्रियाएं

विभाग द्बारा व्यापारीकरण के लिये तैयार उत्पाद/प्रक्रियाएं

  • घरेलू इडी यूनिट का विकास
  • इलेक्ट्रो आयन विहिनीकरण प्रणाली
  • नैनो संघटित मेम्ब्रेन की डिज़ाइन एवं विकास
  • विषमांग-समांग संघटित द्बिध्रुवीय मेम्ब्रेन
  • वैद्युत रासायणिक/रासायणिक मूल्य वृद्धि प्रक्रियाएं

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समुद्री जैवप्रौद्योगिकी एवं पारिस्थितिकी विभाग

सभी समूहों के अधिवेश/कार्य निम्नानुसार है।

  • आण्विक जीवविज्ञान तथा जैवप्रौद्योगिकी
  • कुदरती उत्पाद रसायणशास्त्र
  • समुद्री शैवाल जीवविज्ञान एवं कृषि
  • समुद्री पर्यावरण

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प्रतिवर्ती रसाकर्षण अभियांत्रिकी

अपक्षारीकरण तथा पानी के शुद्धिकरण के लिये सीएसएमसीआरआई की मेम्ब्रेन प्रौद्योंगिकियाँ

मानव अस्तित्व के लिये जल अत्यंत महत्वपूर्ण स्त्रोंतों में से एक हैं चाहे वह मानव उपयोग खेती या उद्योगों के लिये हो। वर्तमान सदी में उपलब्ध स्थायी जल स्त्रोतों में हुई कमी के कारण पीने योग्य पानी की प्राप्ति  सुनिश्चित करना बहुत बडी चुनौती है। देश के कई भागों में प्राप्त पानी उच्च क्षारीयतायुक्त अथवा नुकशानकारक संक्रामकोयुक्त है। इस चुनौती का निवारण करने के लिये नमकीन जल तथा समुद्रीजल का अपक्षारीकरण (विलवणीकरण) तथा जल शुद्धिकरण मुख्य आवश्यकता हैं।

पीने योग्य पानी के उत्पादन हेतु प्रतिवर्ती रसाकर्षण (आरओ) सूक्ष्मनिस्यंदन (एनएफ) तथा अतिसूक्ष्म निस्यंदन (युएफ) जैसी मेम्ब्रेन विलगन प्रक्रियाओं का एक प्रभावी निराकरण के रुप में आर्विभाव हुआ है। CSMCRI ने नमकीन जल तथा समुद्री जल के अपक्षारीकरण तथा अशुद्धिकरण अर्थात्‌ पानी में स्थित पेथागोन्स, सख्ताई, आर्सेनिक, फ्लोराइड जैसे नुकशानकारक संक्रामकों को दूर करने में मेम्ब्रेन अनुसंधान तथा विकास कार्य के लिये देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है।

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बंजरभूमि संशोधन विभाग

यह विभाग अलवणीय तथा लवणीय बंजर भूमि के विकास के उद्देश्य  से अपारंपरिक, तैलयुक्त, किफायती, मरुस्थलीय पौधे (जोजोबा तथा जेट्रोफा) और लवणमृदा अनुकूल पौधे (सेलीकोर्निया, सेल्वाडोरा) के चयन, उन्नयन तथा कृषि प्रौद्योगिकी के विकास में प्रवृत्त है। इस कार्य में उक्त प्रजातियों का चयन, प्रजनन तथा किफायती और टिकाऊ उत्पादन के लिये जैवप्रौद्योगिकी अभिगम द्बारा उन्नयन शामिल है।

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विश्लेषणात्मक विज्ञान

वर्तमान संशोधन एवम्‌ विकास कार्य

  • धनायन/ऋणायन की पहचान के लिये चयनशील आण्विक अंतरक (सेन्सर्स)
  • विश्लेष्य एवं उदासीन अणुओं की दैहिक अवस्था में पहचान
  • प्रकाश प्रेरित ऊर्जा/इलेक्ट्रोन स्थानांतरण प्रक्रिया के अध्ययन हेतु सुपरामोलेक्युलर धातु संयोजन
  • नैनोक्रीस्टलाइन रंजक संवेदनशील सोलर सेल्स (DSSC)
  • स्मार्ट मटीरीयल्स
  • हरित रसायन
  • प्राकृतिक स्रोत(संपदा) से मूल्यवान धातु आयनों की प्राप्ति
  • स्फटिक अभियांत्रिकी
  • कम्प्यूटर अध्ययन

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