वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद

CSIR

Eco-Research

समुद्री जैवप्रौद्योगिकी एवं पारिस्थितिकी विभाग

इस विभाग में निम्नलिखित चार बडे समूह और मन्दपम (तामिलनाडु) में एक फील्ड स्टेशन समाविष्ट हैं।

सभी समूहों के अधिवेश/कार्य निम्नानुसार है।

आण्विक जीवविज्ञान तथा जैवप्रौद्योगिकी

तटीय एवं समुद्री जैवविविधता की संभावनाओं का उपयोग करने, समझने के लिये यह ग्रुप आण्विक जीवविज्ञान तथा जैवप्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सक्रीय अनुसंधान कार्य कर रहा है। इन अध्ययनों का मुख्य केन्द्र तनाव सह्यता की आण्विक संरचना कार्यात्मक जिनोमिक्स, प्रोटियोमिक्स, आण्विक वर्गीकरण विज्ञान, जैव विविधता और जैवउपचारीकरण वर्तमान अनुसंधान कार्य (1) सेलीकोर्निया ब्रेचीएटा, हेलोफाइट्‌स के नमक सह्य जीन्स का विलगीकरण, क्लोनिंग तथा गुणधर्म निर्धारण (2) अजीवात (एबायोटिक) सह्यता में वृद्धि के लिये फसल/केशप्लान्ट की आनुवंशिक अभियांत्रिकी (3) समुद्री शैवाल तथा माइक्रोबस (सूक्ष्मजीव) का जैव रासायणिक एवं आण्विक वर्गीकरण एक्सट्रीमोफील्स तथा समुद्री सूक्ष्म जीवों के जिनोमिक्स तथा मेटाजिनोमिक्स (5) पौधे के विकास में वृद्धि करनेवाले रिहजोबेक्टेरीया तथा उसके जैवप्रौद्योगिकीय उपयोग (6) पौधे के सूक्ष्मजीवों की परस्पर क्रिया की आण्विक संरचना (7) जैवफिल्म संरचना तथा जीवाणु कोरम सेन्सींग (संवेदना) (8) प्रकाश संश्लेषण में वृद्धि तथा CO2 पृथक्करण/स्ववियोजन के लिये चयापचय अभियांत्रिकी (9) औषधीय तथा पोषक तत्वों के स्रोत के रुप में सायनोबेक्टेरीया/सूक्ष्म शैवाल में से जैव वर्णक (पिगमेन्ट)/जैवपदार्थ की प्राप्ति।

कुदरती उत्पाद रसायणशास्त्र

इस ग्रुप का मुख्य संशोधनकार्य समुद्री शैवाल तथा समुद्री शैवाल के पोलीसेकराइड में मूल्यवृद्धि करने का है। विभिन्न समुद्री लाल शैवालों में से परिष्कृत तथा अर्द्धपरिष्कृत केराजीनन, एगरोज बनाने के लिये कुछ पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियाँ विकसित की गई हैं और पेटन्ट ली गई है। (युएस 2005/0267296Al)हाल में, ताज़े युकोमा शैवाल से केराजीनन तथा प्रवाही उर्वरक एकसाथ प्राप्त करने की समाकलित प्रक्रिया के लिये यु एस पेटन्ट प्रदान की गई है। (युएसपी 6,893,479) शैवाल के पोलीसेकराइड पर आधारित केपस्युल के नरम/सख्त खोल(सेल) तथा जैव अवकर्षण क्षमतावाली फील्म (युएस 7067568) करने की विस्तृत संभावनाओं पर ध्यान केन्द्रीत किया गया है। एक अन्य अनुसंधान क्षेत्र जिसमें नये कार्यो की क्षमतावाले पोलीसेकराइड आधारित पदार्थो को बनाने के लिये अगार तथा केराजीनन के भौतिक तथा रासायणिक गुणधर्मो में परिवर्तन के लिये पद्धति विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्बारा प्रायोजित 'समुद्र में से औषधि' के राष्ट्रीय कार्यक्रम अंतर्गत जैवसक्रिय समुद्री शैवाल की पहचान के लिये संशोधन कार्य शुरु किया गया है। सीएसआइआर नेटवर्क योजना अंतर्गत, यह ग्रुप स्थलज पौधों में से जैवसक्रिय संयोजनों पर भी संशोधन कार्य कर रहा है और तटीय क्षेत्र के पौधे से क्षयविरोधी तत्व खोजा गया है जिसके लिये यु एस पेटन्ट भी प्रदान की गई है (युएस 7,442,393)

समुद्री शैवाल जीवविज्ञान एवं कृषि

सीएसएमसीआरआइ तथा इसके मन्दपम स्थित फील्ड स्टेशन में शैवाल संबंधी संशोधन कार्य कर रहे इस ग्रुप का उद्देश्य है, खेती के नये आयाम के रुप में शैवाल कृषि के बारे में अद्यतन ज्ञान अर्जित करना जो इसे फायदेमंद, पर्यावरण अनुकूल, टिकाउ तथा किफायती खेती करने में सहायभूत हो। भारत में समुद्री शैवाल की व्यापारीक खेती के क्षेत्र में कप्पाफाइकस अलवरेजी कृषि प्रौद्योगिकी की नींव डालके उदघोषणा करने का श्रेय व गौरव इस विभाग को प्राप्त है। तामिलनाडु में 800 से ज्यादा ऐसे स्वयंसेवी समूह हैं जिन्होंने अपनी जीविका के रुप में कप्पाफाइकस अल्वरेजी कृषि को अपनाया है। इस ग्रुप द्बारा किये गये संशोधनों के निष्कर्षो ने समुद्री शैवाल के नये उद्योग का विकास किया है जिससे अतिरिक्त रोजगारी के अवसर तथा देश को राजस्व की उपलब्धि हुई है। सामाजिक उद्देश्य के भाग रुप देश में शैवाल की खेती के प्रति जागरुकता लाने तथा प्रगति हेतु इस विभाग द्बारा समुद्री शैवाल कृषि संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन किये गये। इस ग्रुप ने समुद्री शैवाल पर के अपने नवीन अन्वेषणों को कार्यान्वित करने के लिये उद्योंगो तथा स्टोक होल्डरों से भी संपर्क किया है। खाद्य तथा जैवईंधन के रुप में उपयोगी शैवालों के लिये कृषि पद्धति विकसित करते समय अन्य तटवर्ती परिस्थितियों की भी जाँच की गई। भारत के समुद्रीतटों का लाभ उठाने के लिये तट से दूर के क्षेत्र में भी समुद्री शैवाल की कृषि का कार्य शुरु किया गया है लेकिन अभी इस संभावना की विश्वसनीयता देखनी बाकी है। यह ग्रुप भारतीय समुद्रतट की शैवालों की जैवविविधता तथा उसके पूर्वेक्षण को सुलझाने के लिये समुद्री शैवाल जीवविज्ञान में प्रवीणता प्राप्त की है।

समुद्री पर्यावरण

गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) और गुजरात सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के द्बारा पर्यावरण परीक्षक के रुप मान्यता प्राप्त करके यह ग्रुप तटीय प्रांतो की पर्यावरणीय स्थिति नियंत्रण योजना, पर्यावरणीय प्रभाव के मूल्यांकन के बारे में अभ्यास, पर्यावरण परीक्षा तथा विभिन्न उद्योगों और सरकारी विभागों के निर्गमित उच्छिष्ट जल का परीक्षण आदि में कार्यरत है। इस ग्रुप में पर्यावरण इंजीनियर, केमीकल इंजीनियर, रसायणशास्त्री, माइक्रोबायोलोजीस्ट, बोटनीस्ट, बायोटेकनोलोजीस्ट, मरीन बायोलोजीस्ट, ओसनोग्राफर, मोलेक्युलर बायोलोजीस्ट आदि विविध विद्याविशेषज्ञों की टीम है, जो व्यापक पर्यावरण समस्याओं, प्रभाव के बारे में कार्य करते हैं। इस विभाग ने पर्यावरण को सुधारने के उद्देश्य से पर्यावरण सूक्ष्मजीवविज्ञान के साथ परिस्थिति विज्ञन की द्दष्टि से महत्वपूर्ण जीवजात की सूक्ष्मजीवों के साथ परस्पर क्रिया का अभ्यास, एक्ट्रीमोफील्स की जैवविविधता एवम्‌ उनका जैवोपचार में उपयोग आदि पर अपने संशोधन एवं विकास कार्यो को अधिक गहन किया है।

विकसित प्रौद्योगिकियाँ

  • बडे पैमाने पर कप्पाफाइकस तथा ग्रेसीलेरीया इडयुल्स की खेती के लिये प्रौद्योगिकी
  • वनस्पतिजन्य निम्न सोडियम सॉल्ट बनाने की किफायती प्रक्रिया
  • हिप्नीया तथा कप्पाफायकस से परिष्कृत एवं अर्द्धपरिष्कृत केराजीनन (एसआरसी) बनाने की प्रक्रिया
  • कप्पाफायकस एल्वरेजी में से K केराजीनन तथा प्रवाही उर्वरक बनाने की एक समाकलित प्रक्रिया
  • ग्रेसीलेरीया डयूरा में से अगारोज़ बनाने की प्रक्रिया
  • समुद्री शैवाल के पोलीसेकेराइड्‌स पर आधारित बायोडीग्रेडेबल फील्म बनाने की प्रक्रिया
  • प्राणीजन्य जिलेटन के बदले केराजीनन में से नरम तथा सख्त केपस्यूलस बनाने की प्रक्रिया

व्यापारीकरण हेतु उत्पाद/प्रौद्योगिकियाँ

  • समुद्री शैवाल की खेती और उसमें से केराजीनन बनाने के लिये तकनीकी जानकारी मेसर्स पेप्सीको इंडिया होल्डींग्स प्राइवेट लिमिटेड, गोरगांव को अनुज्ञा दी गई है।
  • ग्रेसीलेरिया इडयुल्स की खेती तथा उसमें से अगार बनाने की प्रक्रिया के बारे में मेसर्स कोम्युनीटी एन्टरप्राइज फोरम इन्टरनेशनल (CEFI), नई दिल्ली को अनुज्ञा दी गई है।
  • ताज़े शैवाल में से केराजीनन तथा प्रवाही उर्वरक के उत्पादन की प्रक्रिया की तकनीकी जानकारी मेसर्स पेप्सीको इंडिया होल्डींग्स प्राइवेट लिमिटेड, गोरगांव को हस्तांतरित की गई है।
  • वनस्पति में से कम सोडियमवाले सॉल्ट बनाने की प्रक्रिया की जानकारी मेसर्स एनएमएस फार्मा, भावनगर को हस्तांतरित की गई है।
  • कप्पाफाइकस की खेती की प्रक्रिया के बारे में तकनीकी जानकारी मेसर्स नवेदार नवगाम बोरेश्वर सर्वोदय माछीमार सहकारी सोसायटी लिमिटेड, अलीबाग, महाराष्ट्र और मेसर्स इंडियन सीवीड कंपनी लिमिटेड, विजयवाडा, आंधप्रदेश को अनुज्ञा दी गई है।

मोनोग्राफ

भारतीय शैवाल की उपयोगिता के पहलू की वर्तमान प्रगति

वैश्विक रूपरेखा के संदर्भ में

सीएसएमसीआरआइ ने वैश्विक रूपरेखा के संदर्भ में भारतीय शैवाल की उपयोगिता के पहलू की वर्तमान प्रगति नामक दो वोल्युम में मोनोग्राफ प्रकाशित किये हैं । इसके प्रथम पृष्ठ तथा इन वॉल्युम के विषयवस्तु की स्क्रेन प्रत नीचे दी गई है। ये वोल्युम ग्लोसी आर्ट पेपर पर मुख्यतः चार रंग में मुद्रित किये गये हैं। दोनों वोल्युम की कीमत रु 2,300 अथवा किसी भी एक की कीमत रु 1500 (भारतीय रुपये) हैं। अन्य देशों के अथवा किसी एक वोल्युम के लिए 350 यु एस $ का भुगतान करना होगा। तदुपरांत खरीदार को भारतीय मुद्रा के रु 150 अथवा 10 युएस $ समुद्री डाक/सतह डाक के लिये अथवा एयरमेइल के लिये 20 युएस $ पेकींग तथा प्रेषण प्रभार के लिये भुगतान करना होगा। एक वोल्युम खरीदने के लिये पेकींग या प्रेषण प्रभार समान ही रहेगा। वोल्युम रजिस्टर्ड पोस्ट पार्सल द्बारा भेजा जायेगा। भारतीय विद्यार्थियों तथा अविकसित एवं विकसित हो रहे देशों के विद्यार्थियों के लिये बिक्री कीमत पर 10 प्रतिशत की छूट दी गई है। हालांकि इसके लिये विद्यार्थी को संस्थान के निदेशक, आवासीय युनिवर्सिटी के विभागाध्यक्ष अथवा संलग्न कॉलेजों के प्राचार्य का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा। मोनोग्राफ की कीमत पहले अदा करने के लिये निदेशक, सीएसएमसीआरआइ, के नाम स्टेट ऑफ इन्डिया, दिवानपरा, भावनगर (गुजरात राज्य) भारत को देय रेखांकित डिमान्ड ड्राफ्ट तैयार करवाना होगा।

मोनोग्राफ की कीमत तथा डाक व्यय का पहले, निदेशक, केन्द्रीय नमक व समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान के नाम स्टेट बैंक ऑफ इन्डिया, दिवानपरा, भावनगर (गुजरात राज्य) भारत को देय रेखांकित डिमान्ड ड्राफ्ट द्बारा भुगतान करना होगा।