वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद

CSIR

Eco-Research

बंजरभूमि संशोधन विभाग

यह विभाग अलवणीय तथा लवणीय बंजर भूमि के विकास के उद्देश्य  से अपारंपरिक, तैलयुक्त, किफायती, मरुस्थलीय पौधे (जोजोबा तथा जेट्रोफा) और लवणमृदा अनुकूल पौधे (सेलीकोर्निया, सेल्वाडोरा) के चयन, उन्नयन तथा कृषि प्रौद्योगिकी के विकास में प्रवृत्त है। इस कार्य में उक्त प्रजातियों का चयन, प्रजनन तथा किफायती और टिकाऊ उत्पादन के लिये जैवप्रौद्योगिकी अभिगम द्बारा उन्नयन शामिल है।

(सिमोन्डेसीया चैनान्सीस) जोजोबा

अलवणीय बंजर भूमि का उपयोग करने के लिये इस विभाग ने जोजोबा (सिमोन्डीसीया चैनान्सीस) नामक अमेरीकन रण प्रदेश के पौधे को हमारे देश में उगाया। उपज़ तथा अन्य इच्छित प्राचलों के आधार पर नर एवं मादा पौधों का चयन किया गया। मातृपौधे और उसकी वंशवृद्धि से उच्च उत्पादन के लिये श्रेष्ठ आनुवंशिक रुप पहचाने गये। सभी विशिष्ट पौधे के उत्पादनकारी अक्षांक पर कार्य किया गया और उसके परिणामों की तुलना विभिन्न देशों में उगाये गये जोजोबा उद्यान के साथ की गई। उपज़ की संभावना/समर्थता के प्रदर्शन में सीएसएमसीआरआइ जननद्रव्यों (जर्म प्लाज्म) ने इज़रायेल के बाद दूसरा स्थान प्राप्त किया। चयनित पौधों के उद्यान में नरमादा पौधों के अनुकूल अनुपात रखने के लिये, विशिष्ट पौधों के बडे पैमाने पर उत्पादन के लिये उत्तक संवर्धन प्रक्रिया विकसित की गई।

Jojoba plantation at sand dunes 


जेट्रोफा करकस

Jatropha seeds and oilअत्यंत महत्वपूर्ण अपारंपरिक तेल की उपज़ देनेवाले पौधे के रुप में जेट्रोफा करकस को जाना जाता है जो जैवइंधन (बायोडीज़ल) बनाने में प्रयुक्त होता है।

यह विभाग, नर्सरी तैयार करने और कृषि प्रौद्योगिकी के विकास के लिये देश के विभिन्न प्रदेशों से विशिष्ट क्लोन की पहचान के लिए विस्तृत कार्य कर रहा है। सीएसएमसीआरआइ ने बंजरभूमि पर जेट्रोफा की खेती के विचार के प्रवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और हाल में, दो भिन्न वातावरणवाले प्रदेशों (उडीसा एवं गुजरात) में विभिन्न अभिगम के साथ 50 हेक्टर से भी ज्यादा भूभाग पर खेती की गई है।


विशेष पढ़िएं >>
Jatropha plantation at Chorvadla Elite plant bearing fruits in cluster

जेट्रोफा वन्य प्रकृति का पौधा होने के कारण, इसकी खेती को आर्थिक द्दष्टि से जीवनक्षम बनाने के लिये एक महत्वपूर्ण कसौटी है। इसके बीज उत्पादन में सुधार करने, उच्च उपज़ तथा भविष्य में उद्यान बनाने के लिये, प्रदर्शन के आधार पर जेट्रोफा के विशिष्ट पौधे चुने गये। चयनित जननद्रव्यों में से कटाई एवं सूक्ष्मप्रजनन दोनों पद्धतियों से क्लोन बढ़ाये गये। जेट्रोफा के सूक्ष्म प्रजनन की पद्धति विकसित की गई और इस तरह उगाये गये छोट पादपों को, प्रतिकूल परिस्थितियों में उनकी वृद्धि का मूल्यांकन करने के लिये खेत में लगाये गये। विभिन्न आयु के विभिन्न आनुवंशिक रुप वाले पौधों का उपयोग करके, किफायती पादप वृद्धि के लिये उत्तम पद्धति विकसित करने के बारे में प्रयोग ज़ारी है। सीएसएमसीआरआइ के फील्ड में उगाये गये और रखे गये विभिन्न जननद्रव्यों का प्रजनन अभिगम जानने के लिये और क्यूटीएल निर्देशिका तथा निर्दिष्ट माप चित्रवाले जेट्रोफा पौध समुदाय की आनुवंशिक फसल में सुधार करने के लिये उनके आनुवंशिक संबंध और विविधता का आण्विक चिह्म अभ्यास भी किया गया। उत्तम कृषि विज्ञान संबंधी अभ्यास निर्धारित करने के लिये जेट्रोफा के पौधे के अंतर तथा उर्वरक की आवश्यकता पर क्षेत्रीय परीक्षणों का गहन अध्ययन किया गया। जेट्रोफा के बीज से तेल निकालने के बाद बची खली (केक) को कार्बनिक उर्वरक के रुप में उपयोग करने के लिये परीक्षण किये गये।

Testing of  Biodiesel in  vehicles at Khardungla pass

संस्थान ने डेमलर क्राइसलर और डीइजी जर्मनी और होनहेम युनिवर्सिटी के सहयोग से बंजर भूमि पर जेट्रोफा की खेती, तैल और तैल निकालने के बाद बची खली के उपयोग के लिये परीक्षण किये। हाल में यु एस डीपार्टमेन्ट ऑफ एनर्जी और जरनल मोटर्स के सहयोग से सीएसएमसीआरआइ ने संस्थान द्बारा विकसित उत्तम जननद्रव्यों तथा कृषि विज्ञान पद्धति का उपयोग करके सीमांत भूमि पर जेट्रोफा अधिकतम संभावित उपज़ के लिये अन्वेषण किया है।

उच्च गुणवत्तायुक्त बायोडीज़ल

सीएसएमसीआरआइ द्बारा बहिःस्त्राव रहित प्रक्रिया विकसित की गई है जहाँ उपयुक्त उत्प्रेरक को उपयोगी उर्वरक में परिवर्तित किया गया है। इस प्रक्रिया को यु एस पेटन्ट (यु एस 2006/0080891/दिनांक 20/4/2006) द्बारा सुरक्षित किया गया है और सीएसएमसीआरआइ को भूतकाल में ऐसे प्लान्ट की संपूर्ति करने का यथेष्ट अनुभव हैं। सीएसएमसीआरआइ में जेट्रोफा से उत्पादित बायोडीज़ल EN 14214 मानक का है तथा चयनित (मर्सिडीज बेन्ज तथा अन्य वाहन) तथा स्थिर यंत्रो में परिवर्तन किये बगैर इसका परीक्षण किया गया। बायोडीज़ल का बहाव बिन्दु नीचे लाने में निम्नलिखित सफलता प्राप्त हुई है। 2005 अगस्त को उच्च अंक्षास के दुर्गम स्थल पर इसकी कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिये सी क्लास मर्सीडीज़ कार तथा विआनो वान का ल्युब्रीज़ोल इंडिया के सहयोग से डेमलर क्राइसलर द्बारा परीक्षण किया गया। सीएसएमसीआरआइ ने राजस्थान स्टेट माइन्स एन्ड  मिनरल्स को लाइसेन्स दिया है तथा निदर्शन प्लान्ट उदयपुर के नज़दीक शुरु किया गया है। सीएसएमसीआरआइ ने DRDO के लिये 1 टन प्रतिदिन की क्षमतावाला समाकलित बायोडीज़ल प्लान्ट भी लगाया है। RSMML ने टावेरा वान तथा माइनींग उपकरण में बायोडीज़ल के श्रेष्ठ कार्य प्रदर्शन की रिपोर्ट दी है। सीएसएमसीआरआइ अगस्त 2006 से टोयेटो क्वोलीस में बिना किसी मिलावट बायोडीज़ल का उपयोग कर रहा है और 1,25,000 कीमी चलायी है जो जीवाश्म इंधन से समकक्ष है। सीएसएमसीआरआइ में तैयार किये गये बायोडीज़ल की गुणवत्ता देखकर युरोपीयन सरकार ने हमें वर्ष 2005 के पर्यावरण नेतृत्व एवार्ड प्रदान किया है। डेमलर क्राइसलर तथा DEG , जर्मनी, NIMITLI (CSIR, नई दिल्ली) तथा इंडस्ट्रीज़ कमिश्नरेट, गांधीनगर (गुजरात सरकार, भारत) के सहयोग में जेट्रोफा कृषि की एक परियोजना पर कार्य हो रहा है।

सेलीकोर्निया ब्रेचीएटा

भारत में खारी जमीन पर समुद्रीजल के उपयोग द्बारा सेलीकोर्निया की खेती करने का नया प्रयास किया गया। समुद्रतटीय खारी जमीन का उपयोग करके सेलीकोर्निया ब्रेचीएटा की कृषिविज्ञान पद्धति संपूर्णतया विकसित की गई और साथ ही पुनरावर्ती चयन द्बारा उच्चतम फसल के लिये जननद्रव्य विकसित किया गया। इसकी खेती को किफायती बनाने के उपाय खोजने के दौरान यह पाया गया कि सेलीकोर्निया ब्रेचीएटा के कुदरती आवास में सघनता लाने से खेती संबंधी खर्च को कम किया जा सकता है क्युंकि प्राकृतिक रुप से समुद्रीजल द्बारा जलमग्न होने पर पौधों की सिंचाई संबंधी आवश्यकता की पूर्ति हो जाती है। वर्षाऋतु का लाभ लेते हुए गुजरात के विभि्रन स्थलों के समुद्रीतट पर सेलीकोर्निया ब्रेचीएटा के बीच बिखेर देने से प्रतियूनिट बायोमास का क्षेत्र बढाया जा सका।

सेलीकोर्निया ब्रेचीएटा को किफायती बनाने के लिये तैल के एवं उसके अग्रभाग के अतिरिक्त, तैल निकालने के बाद बचे हुए बायोमास में से वनस्पतिजन्य नमक बनाने की प्रक्रिया विकसित की गई। इस नमक में सोडियम क्लोराइड के अतिरिक्त अन्य पोषक तत्व भी पाये गये जो सामान्यतः समुद्री नमक में नहीं पाये जाते। वनस्पतिजन्य नमक बनाने की प्रौद्योगिकी को स्थानिक एन्टरप्रीनर को व्यापारीक उत्पादन हेतु हस्तांतरित किया गया है।

Salicornia_cultivation1
हाथब, भावनगर में अति लवणीय जमीन पर सेलीकोर्निया की कृषि
Edible_Oil
खाद्य तैल लिनोलेइक एसीड से समृद्ध
Vegetable_Salt
सूक्ष्म पोषकोंयुक्त वनस्पतिजन्य नमक
सेल्वाडोरा पर्सिका

Salvadora_persica_plantationसेल्वाडोरा के बीज के तैल में मीरीस्टीक और ल्युरीक एसीड विशेष मात्रा में होता है। यह तैल साबुन एवं डीटरजन्ट उद्योगों में नारीयेल तैल के विकल्प के रुप में उपयोग में लिया जाता है। क्षारीय एवं अम्लीय जमीन पर सेल्वाडोरा पर्सिका को उगाकर मूल्यांकन किया गया और दोनों प्रकार की जमीन पर इन्हें सफलतापूर्वक उगाया गया। अत्यंत खारी जमीन पर, नमकीन जल की सिंचाई करके सेल्वाडोरा पर्सिका की खेती करने की कृषि प्रौद्योगिकी विकसित की गई है। सीएसएमसीआरआइ द्बारा भचाउ, कच्छ (300 एकड़) के किसान के खेत में, मेसर्स गोदरेज सोप इन्डस्ट्री, घाटकोपर, मुंबई (5 हेक्टर), आरसीएफ कम्पनी, मुंबई (1 हेक्टर) और विशाखापटृनम्‌, स्टील प्लान्ट, आंध्रप्रदेश (25 हेक्टर) में सेल्वाडोरा पर्सिका का उद्यान विकसित किया गया है।

पिछले पाँच वर्ष के दौरान प्राप्त उप्लब्धियाँ

  • प्रकाशनों की संख्या : 21
  • फ़ाइल की गई / स्वीकृत पैटंट्स : 06
  • विकसित प्रौद्योगिकियाँ : 02
  • परामर्शकार्य का उत्तरदायित्व लिया गया : 02