वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद

CSIR

विश्लेषणात्मक विज्ञान

वर्तमान संशोधन एवम्‌ विकास कार्य

Analytical Sciences
धनायन/ऋणायन की पहचान के लिये चयनशील आण्विक अंतरक (सेन्सर्स)
कृत्रिम रिसेप्टर की डिज़ाइनींग पर अधिक ध्यान इसलिये केन्द्रीत हुआ है क्युंकि ये चयनशील आयन की पहचान के लिये अंतरक के रुप में कार्य करने में सक्षम है। पिछले कुछ सालों से हम इस पर कार्य कर रहे हैं और केलीक्सक्राउन संकरित आइनोफोरस की श्रृंखला विकसित की हैं जो विभिन्न ऋणायन को इच्छित रुप से बंध सकते हैं। विभिन्न ऋणायन एवम्‌ धनायन की पहचान में उपयोगी मेटल पोलीपीरीडील आधारित फ्लोरोफोरस और एज़ाक्राउन/केलीक्स (4) एरीन/केलीक्स क्राउन/दीर्घचक्रीय आधारित आइनोफोर की आण्विक अतंरक श्रृंखला संश्लेषित की गई। कई मामलों में, जैसे आल्कली मेटल आयन K+, विषैली धातु आयन जैसे Hg2+ और Pb2+ संक्रमित धातु आयन जैसे Fe3+ और Cu2+, विषैले धनायन जैसे F- और जैविक रुप से महत्वपूर्ण धनायन H2PO4- के लिये उच्च चयनशीलता प्राप्त की गई।
विश्लेष्य एवं उदासीन अणुओं की दैहिक अवस्था में पहचान
जैविक और पर्यावरण महत्वपूर्ण होने के बावजूद ऐसे उदाहरण कम है जिसमें धनायन एवं ऋणायन विश्लेष्य और उदासीन अणुओं की दैहिक अवस्था में पहचान की जा सके। इसकी मर्यादा यह है कि ऐसे संवेदी की डिज़ाइन के लिये पानी में कम धुलनशीलता, किसी विशिष्ट आयन के लिये प्रतिसंवेदना, दैहिक अवस्था में स्प्रेक्टल/ओप्टीकल संवेदनशीलता और प्रतिभाव समय कम है। जैविक रुप से महत्वपूर्ण आयन्‌स जैसे (Hg2, Cu2+, Cr2+, Lnn+,  फोस्फेट, साइनाइट, एटीपी, पायरोफोस्फेट, कुछ ओएलीगोपेप्टाइड आदि) और उदासीन अणुओं जैसे ( NO, CO2, CO, कुछ अमीनो एसीड इत्यादि) की डिज़ाइन और विकास की चुनौती में आयन्‌स के मामले में घातक जलीय ऊर्जा और उदासीन विश्लेष्य के मामले में कमजोर आयन डायपोल परस्पर क्रिया भी जिम्मेदार है। इस चुनौतीपूर्ण कार्य में सीएसएमसीआरआइ के वैज्ञानिक सक्रिय अनुसंधान कार्य कर रहे हैं।
प्रकाश प्रेरित ऊर्जा/इलेक्ट्रोन स्थानांतरण प्रक्रिया के अध्ययन हेतु सुपरामोलेक्युलर धातु संयोजन
हाल में, इलेक्ट्रोनिक एवम्‌ फोटोमोलेक्युलर उपकरणों में अनेकविध उपयोग का सामर्थ्य और फोटोफीजीकल गुण से समृद्ध होने के कारण प्रकाश सक्रिय सुपरामोलेक्युलर धातु संयोजनो पर विशेष संशोधनकार्य हो रहा है। हमने निर्माण नींव के रुप में बिसबाइपीरीडीलरुथेनियम(II)/ओसमीयम(II) युनिट और अंतरक के रुप में पूर्णतः/अंशतः कोन्जुगेटेड एकन्टेन्डेड एरोमिक भागवाले कई रेडोक्स एवम्‌ प्रकाश सक्रिय सुपरामोलेक्युलर प्रणालिओं का अध्ययन किया है। इन सुपरामोलेक्युलर संयोजनो की रीडोक्स, ल्युमीनेशन्स गुणधर्मो (इमीशन स्पेक्ट्रा, क्वोन्टम यील्ड और जीवन काल) तथा अंतरघटकीय ऊर्जा स्थानांतरण प्रक्रियाओं का अध्ययन किया।
नैनोक्रीस्टलाइन रंजक संवेदनशील सोलर सेल्स (DSSC)
वर्तमान में उपयोग हो रहे P-N जंकशन फोटोवोल्टीक उपकरणों के विकल्प में नैनोक्रीस्टलाइन डाइ-संवेदनशील सोलर सेल्स ने सक्षम एवम्‌ कीफायती उपयोग के कारण संशोधन के क्षेत्र में ध्यान आकर्षित किया है। 12% से अधिक पूर्ण सौर शक्ति परिवर्तन में कुशलता पाने की एक प्रयुक्ति है उचित और पूर्वनिर्मित संवेदी अणुओं उपयोग जो सोलर स्पेक्ट्रम को व्यापक रुप से शोषित कर रहें। 400 nm से 800 nm क्षेत्रवाले सौर एमिशन के प्रभावी उपयोग के लिये वैज्ञानिक एक ऐसा रंजक संवेदी की खोज कर रहे हैं जो पूर्ण वीजीबल से इन्फ्रारेड तक की वेवलेन्थ को अधिशोषित कर सके। इसके अलावा, इलेक्ट्रोन इन्जेक्शन अग्रेषण की बहतर प्राप्ति और घातक पुनःइलेक्ट्रोन स्थानांतरण, अच्छी फोटोकरन्ट परिवर्तन क्षमता पाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। कई वैज्ञानिको का मानना है कि इस समस्या का समाधान निम्नानुसार हो सकता है- उचित डिज़ाइन, संवेदी, रंजक की उतेजित अवस्था की निर्धारित स्थिरता और ऐसा रंजक जिसमें समाकलित रंजक अणु हो जो खुद इलेक्ट्रोन का परित्याग कर दें। संश्लेषित रसायणशास्त्र की द्रष्टि से तथा अंतराफलकीय एलेक्ट्रोन स्थानांतरण डायनेमिक्स पर किये गये अभ्यास के आधार पर हमने यह चुनौति स्वीकार की ।
स्मार्ट मटीरीयल्स
सुपरामोलेक्युलर संरचना (मेटलोहेलीकेट्‌स) की संरचना क्रिया परस्पर संबंध तथा इनकी सोल्वेटोक्रोमीज़म, एनेन्शियोसेपरेशन, नैनोमटीरीयल्स, काइरल सेन्सर्स, मोलेक्युलर अभिज्ञान तथा उत्प्रेरण में उपयोगिता पर अध्ययन किया गया।
हरित रसायन
इसमें कार्बनिक संयोजनो को लवणीकृत करने की ग्रीन प्रक्रियाओं, आल्कीन्‌स और आल्काइन का स्थानीय परिचालन, औषध रसायन और औद्योगिक मध्यकों का संश्लेषण, नाइट्रोजन विषम चक्रीय संयोजनो (आइसोइनडोल्स, नेप्थायरीडीन्‌स, 3-एमिन्स आदि) विभिन्न कार्बनिक समूहो के ओक्सीडेशन के लिये ग्रीन रीएजन्टस, आल्काइल/बेन्जाइल इथरस, ब्रोमो आल्काइलीथरस के संश्लेषण के लिये ग्रीन पद्धतियाँ, टर्मिनल आल्काइन से 1,3 डाइनस का कोपर उत्प्रेरित उपचरित सहसंयोजन, हाइड्रोएरीलेशन प्रतिक्रियाएं, बेस उत्प्रेरण प्रक्रिया द्बारा जेट्रोफा करकस के बीज का विपक्ष एस्टीकरण आदि सम्मिलित हैं।
प्राकृतिक स्रोत(संपदा) से मूल्यवान धातु आयनों की प्राप्ति
हमारे देश में पोटाश की आवश्यकता की पूर्ति आयात द्बारा की जाती है। अतः प्राकृतिक संपदा से पोटाश प्राप्त करने हेतु प्रौद्योगिकी विकसित करना महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में बिटर्न जैसे प्राकृतिक स्रोत से उच्च चयनशीलता के साथ पोटाश के निष्कर्षण हेतु वर्तमान तथा नये संश्लेषित निष्कर्षकों (लिगेन्डस) की श्रृंखला का उपयोग करके विस्तृत कार्य किया गया है। इन निष्कषकों में से एक, शायोनाइट/बिटर्न में से 98% भी ज्यादा K+ तत्काल अवक्षेपित करता है। शायोनाइट सहउत्पाद में से KCL के रुप में पोटाश्यिम का निष्कर्षण तथा जलीय KCL का सल्फेट ऑफ पोटाश के उत्पादन में उपयोग करने के लिये प्रक्रिया विकसित की गई है। सीएसएमसीआरआइ अन्य मूल्यवान धातु आयनों की प्राप्ति हेतु कार्यरत है।
स्फटिक अभियांत्रिकी
इसमें एक्सरे क्रिस्टलोग्राफी, मेटल ओरगेनीक फ्रेमवर्क, सुपरामोलेक्युलर केमेस्ट्री, स्फटिक अभियांत्रिकी (क्रीस्टल एन्जीनीयरींग), ऋणायन की पहचान पर अभ्यास मुख्य हैं।
कम्प्यूटर अध्ययन
कम्प्यूटर केमीस्ट्री/मोलेक्युलर मोडलींग प्रविधियों का उपयोग स्फटिक आकारिकी, अंतरक, कार्बनिक/अकार्बनिक प्रतिक्रियाओं एवम्‌ औषधों, छोटे अणुओं के क्षेत्र में अनुसंधान की समस्याओं में किया जाता है।

अनुसंधान संपर्क

यह विभाग विभिन्न अनुसंधान एवम्‌ विकास प्रवृतियों के लिये कई राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ कार्यरत है।

  • पिछले दो साल के दौरान कार्यप्रदर्शन
  • सम्मान/एवोर्डस
  • वर्तमान अनुसंधान योजनाओं के लिये फन्डींग एजन्सियाँ
अनुसंधान प्रकाशन:

वर्ष

प्रकाशनों की संख्या

औसत प्रभाव कारक

2008 40 2.699
2009 37 2.867
पी एचडी कर रहे अनुसंधान छात्रों की संख्या: 27
  • फॅलो ऑफ इंडियन एकेडेमी ऑफ सायन्सीज, बंगलूर : 1
  • सीआरएसआइ : 2
  • सीएसआइआर यंग सायन्टीस्ट एवोर्ड  : 1
  • बोयस कास्ट फेलो : 3
  • जेएसपीएस फेलो :1
  • सीएसआइआर डाड फेलो :1
  • रमन फेलो : 1
  • डॉ विक्रम साराभाइ एवोर्ड  :1
  • इन्सा/डीएफजी रिसर्च फेलो : 1
  • 1     डिपार्टमेन्ट ऑफ सायन्स एन्ड टेकनोलोजी (डीएसटी), नई दिल्ली
  • 2     मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेन्ट एन्ड फोरेस्ट, नई दिल्ली
  • 3     बोर्ड ऑफ रिसर्च इन न्युक्लीयर सायन्स (BRNS), डीएइ
  • 4     डिफेन्स रिसर्च एन्ड डेवलपमेन्ट ओरगेनाइज़ेशन (डीआरडीओ), ग्वालीयर
  • 5     मिनिस्ट्री ऑफ एज्युकेशन सायन्स एन्ड स्पोर्टस (MESS) झाग्रेब, कोटिया
  • 6     डिपार्टमेन्ट ऑफ बायोटेकनोलोजी (डीबीटी), न्यु दिल्ली